
Arbi ki kheti : कम जगह में करे अरबी की खेती होगा लाखो का मुनाफा, जानिए कैसे की जाती है इसकी खेती अरबी एक बहुत ही लाभदायक फसल है, जो कम मेहनत और लागत में अधिक मुनाफा देती है। यह फसल आलू की तरह दिखती है और कई पोषक तत्वों से भरपूर होती है, जिससे इसकी मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है। अरबी की खेती करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है।
कहा कहा होती है अरबी की खेती
अरबी की खेती देश के कई इलाकों में होती है, जैसे कि पंजाब, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश, आसाम, गुजरात, महाराष्ट्र, केरला, आंध्रा प्रदेश, उत्तराखंड, उड़ीसा, पश्चिमी बंगाल, कर्नाटक, और तेलंगाना. मध्य प्रदेश के खरगोन ज़िले में भी अरबी की खेती बड़े पैमाने पर होती है।
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कैसे करे अरबी की खेती
अरबी की खेती के लिए ऐसी जगह का चयन करें जहां जल निकास की अच्छी व्यवस्था हो। अरबी की फसल को ज्यादा पानी सहन नहीं होता, इसलिए जलभराव से बचाव जरूरी है। अरबी की खेती के लिए अच्छी गुणवत्ता के बीज का चयन करें। बीज स्वस्थ और रोगमुक्त होने चाहिए। बीज बोने से पहले उन्हें फफूंदनाशक दवा से उपचारित कर लेना चाहिए। अरबी की बुवाई का सही समय जून-जुलाई (वर्षा ऋतु) है। इस समय मिट्टी में नमी बनी रहती है, जो फसल के लिए अनुकूल होती है। अरबी की फसल को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। गर्मी के मौसम में सप्ताह में एक बार और सर्दी में 10-15 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।
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अरबी की कटाई और उत्पादन
रबी की फसल 4-5 महीने में तैयार हो जाती है। जब पत्तियां पीली पड़ने लगें और सूखने लगें, तो समझ जाएं कि फसल कटाई के लिए तैयार है। फसल को खोदकर निकालें और अच्छी तरह साफ करके बाजार में बेचें। अरबी की खेती में लागत कम आती है, लेकिन इसकी पैदावार और बाजार में मांग के कारण यह किसानों के लिए अधिक मुनाफे वाली फसल साबित होती है। अरबी का उपयोग सब्जी, चिप्स, और अन्य खाद्य उत्पादों में किया जाता है, जिससे इसकी बाजार में अच्छी कीमत मिलती है।